बधाई हो!!!!!!!!!!!!!!!!!

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घर में छोटे मेहमान का आना हमेशा ही खुशियों का मौक़ा होता है. लेकिन क्या हो जब ये मेहमान जवान बच्चों की नहीं, उनके मां-बाप की गोद भर रहा हो? मम्मी-पापा बुढ़ौती में बच्चे कैसे पैदा कर सकते हैं यार! ये कोई उम्र है इन कामों की? क्या गुज़रेगी उन जवान बच्चों पर जब अपना बच्चा पैदा करने की उम्र में मम्मी-पापा छोटा भाई या बहन पकड़ा दें! दोस्त क्या कहेंगे? मोहल्ले वाले कैसे रिएक्ट करेंगे? रिश्तेदारों को क्या मुंह दिखाएंगे? समाज किन नज़रों से देखेगा?

कौशिक परिवार का डिज़ास्टर

दिल्ली शहर में रह रही लाखों मिडल-क्लास फॅमिली में से एक है कौशिक परिवार. मध्यमवर्गीय मानसिकता का चलता-फिरता इश्तेहार. जहां बाप इतना कंजूस है कि नौकर को टीप में आम देता है. ऊपर से कहता है, ‘जा ऐश कर’. जहां सांस का बहू को निरंतर कोसना घरेलु कामों में शामिल है. जहां कार तो है लेकिन 13 साल पुरानी. कुल पांच लोग हैं कौशिक परिवार में. जीतू और प्रियंवदा कौशिक. उनके बच्चे नकुल और गूलर. और दादी. समस्या तब खड़ी होती है जब छठे मेंबर के आने की न्यूज़ ब्रेक होती है. क्या बच्चे, क्या माता-पिता, सब हैरान-परेशान हैं. इस अजीब सिचुएशन से कौशिक परिवार कैसे निपटता है ये सिनेमा हॉल में जाकर देखना बनता तो है बॉस!

एक्सप्रेशंस का इंद्रधनुष 

अच्छी एक्टिंग और कुछ नहीं, सही समय पर सही एक्सप्रेशंस का मुज़ाहिरा भर है. अगर इस बात का सबूत देखना हो तो ये फिल्म देखकर आइए. लगता है हर कलाकार ने शब्दों से ज़्यादा हावभाव पर मेहनत की है. कई बार तो किरदार एक शब्द नहीं बोलता और आप महज़ एक्सप्रेशन से ही चित हो जाते हैं. एक सीन का ज़िक्र करना चाहूंगा. मिसेज़ कौशिक की प्रेगंसी डिस्कवर करने वाले डॉक्टर बग्गा के चेहरे पर कैमरा आ टिका है. उस सीन में डॉक्टर बग्गा एक शब्द नहीं बोलते लेकिन उनकी शक्ल पर उभरे कमीनेपन के भाव देखकर आप जान जाते हैं कि ये आदमी क्या सोच रहा है. गॉसिप करने लायक भरपूर मसाला मिलने की ख़ुशी डॉक्टर के चेहरे से टप-टप टपकती है.

कास्टिंग डायरेक्टर को अवॉर्ड दे दो

जब हम एक्टिंग की बात करेंगे तो आयुष्मान खुराना, सान्या मल्होत्रा या नीना गुप्ता से शुरू नहीं करेंगे. ये सब तो उम्दा हैं ही लेकिन स्टार अट्रैक्शन है दादी. यानी सुरेखा सीकरी. तेज़ाबी ज़ुबान वाली सासू मां. उनका किरदार जितने अच्छे तरीके से लिखा गया है उससे कई गुना अच्छे तरीके से उन्होंने निभाया है. उनके मुंह से सामान्य डायलॉग भी दर्शकों से ठहाका लगवा देते हैं. जब पहली बार उन्हें प्रेग्नेंसी का पता चलता है तब उनका फट पड़ना देखने वाली चीज़ है. ये फिल्म तो महज़ उस एक सीन के लिए भी देखी जा सकती है. इसी तरह जब सारे रिश्तेदार बहू को शर्मिंदा कर रहे होते हैं, यही खड़ूस सास उसकी हिमायत में पूरा घर हिला देती है. सुरेखा सीकरी को आराम से दस में से सौ नंबर दिए जा सकते हैं.

 

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