बाहुबली स्टार प्रभास को लेकर डायरेक्टर सुजीत ने एक्शन फिल्मों का नया बाहुबली पेश किया है। इस बाहुबली का नाम है साहो। एक्शन, स्टंट, कार चेजिंग, शानदार लोकेशंस और वीएफएक्स के चमत्कारों से भरी है फिल्म। फिल्म में कमियां भी हैं लेकिन इस तरह की एक्शन फिल्मों के लिए वे कमियां ज्यादा मायने नहीं रखतीं।

फिल्म की स्टोरी लाइन ये है कि रॉय (जैकी श्रॉफ) एक बहुत बड़े क्राइम और बिजनेस सिंडिकेट का बॉस है। लेकिन बरसों बाद जब वो इंडिया आता है तो रोड पर कार एक्सिडेंट में उसकी मौत हो जाती है। मगर ये एक्सिडेंट नहीं मर्डर है। मर्डर किसी और ने नहीं, खुद उसके बड़े भाई के बेटे देवराज (चंकी पांडे) ने करवाया है और मोटिव है रॉय ग्रुप की कुर्सी। खरबों के साम्राज्य पर कब्जा। लेकिन बरसों एक राज बनकर रह रहा रॉय का बेटा विश्वांक (अरुण विजय) सामने आता है और अपनी काबिलियत साबित करके रॉय ग्रुप का बॉस बन जाता है। जाहिर है देवराज उसका वेलकम तो करेगा नहीं। और फिर दो परिवारों की यह जंग एक खूनी जंग में बदल जाती है।

रॉय ग्रुप की अरबों की रकम शिप से उड़ा ली जाती है। यह रकम कहां है, इसका राज छुपा है एक ब्लैकबॉक्स में। और इसलिए सबको तलाश है इस ब्लैकबॉक्स की। पुलिस के अंडरकवर ऑफिसर अशोक चक्रवर्ती (प्रभास) को अरमानी (नील नितिन मुकेश) से इस ब्लैकबॉक्स का सुराग पता चलता है। तो पुलिस की एक पूरी टीम भी इस ब्लैकबॉक्स की तलाश में जुट जाती है। इस टीम में है अमृता नायर (श्रद्धा कपूर), डेविड (मुरली शर्मा) और कई दूसरे लोग। इस टीम में ही कोई है जो सारी इंफॉरमेशंस देवराज को लीक करता जाता है।

इसी बीच कुछ ऐसा होता है कि पुलिस की पूरी टीम के पांवों तले जमीन खिसक जाती है। पुलिस चोर नजर आने लगती है और चोर पुलिस। धोखे, गैंगवार और रॉय सिंडिकेट पर कब्जे की इस लड़ाई में कई ट्विस्ट आते हैं जिनका पता आपको फिल्म देखकर चलेगा।

पूरी फिल्म के दौरान हॉल में सीटियां बजती रहती हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह है शानदार विजुअल्स। फिल्म में एक्शन के सीन हों या रोमैंटिक गानों के, हर सीन भव्य स्तर पे फिल्माए गए हैं। पैसा पानी की तरह बहाया गया है। लेकिन दर्शकों की आंखें खूबसूरत विजुअल्स में खो जाती हैं। वीएफएक्स की मदद से तैयार एक्शन और स्टंट के विजुअल्स इस लेवेल पर हिंदी फिल्म में पहली बार देखने को मिले हैं।

कार चेजिंग, उड़ती बाइकें दर्शकों को धूम सीरीज की फिल्मों में भी देखने को मिल चुकी हैं लेकिन साहो में पूरी फिल्म ही एक्शन के दृश्यों से भरी हुई है। एक से बढ़कर एक भयानक शरीर और डरावने चेहरे वाले लोगों का मजमा लगता जाता है। पूरी फिल्म में गोलियां ऐसे चलती हैं जैसे आतिशबाजी हो रही हो। ऐसे ऐसे हथियार एक एक करके गोलियां बरसाने के लिए परदे पर आते हैं जिन्हें देखकर दर्शक हैरत में चिल्लाते हैं और तालियां बजाते हैं। और उनका पैसा वसूल हो जाता है।

यह जरूर है कि इन हथियारों से चलने वाली गोलियों को पता है कि साहो और अमृता फिल्म के मुख्य किरदार हैं। इन्हें मरने नहीं देना। इनपर बरसना लेकिन इन्हें छूना नहीं, जादू से इधर उधर रास्ता भटक जाना। जैसे गोलियां भी हीरो की आंखों से हिप्नोटाइज्ड हो जाती हों। लेकिन दर्शक ये सब सोचकर अपना हाजमा खराब करने के चक्कर में नहीं पड़ते ।

वे अच्छी तरह जानते हैं कि एक साहो 20 या पचास ऐसे खतरनाक लोगों को हरगिज़ धूल नहीं चटा सकता जैसा फिल्म में हो रहा है। उन्हें तो खतरनाक हथियार, मारने के तरीके, और स्टंट देखकर मज़ा आता है। ये ज़रूर है कि एक ज़माने में  मिथुन चक्रवर्ती को 20-20 गुंडों को मारते देख हम मज़ाक उड़ाया करते थे। लेकिन हॉलीवुड की एक्शन फिल्में और बाहुबली जैसी फ़िल्मों का दर्शक क्या चाहता है? क्या बाहुबली के दर्शक इतने भोले हैं कि सब सच मानकर देखते है? भैये, ये कोरी कल्पना परोसती हैं! और फिर भी ये फिल्में करोड़ों बटोरती हैं।

SAAHO में दर्शकों के एंटरटेनमेंट के लिए इतना साजोसामान इकट्ठा किया गया है कि इस मीनमेख के चक्कर में वे परदे पर आ रहे शानदार विजुअल्स और ट्विस्ट देखने के मौके गंवाना नहीं चाहते।

​फिल्म का डायरेक्शन कमाल का है। एक्शन, डांस, रोमांस, स्टोरीलाइन सब मोर्चों को मजबूती से संभाला गया है। फिल्म कहीं भटकती नहीं। कहानी के टिव्स्ट जब दर्शकों के सामने आते हैं तो दर्शक खुशी से शोर मचाते हैं। ये नहीं कि ये कैसे हो गया।

एवेंजर्स सीरीज की फिल्में देख चुका दर्शक भी कहीं इसे कमतर नहीं पाता। बल्कि उन फिल्मों की टक्कर के कई दृश्य फिल्म में देखे जा सकते हैं। चमचमाती इमारतें, खतरनाक पहाड़ियां, वीरान युद्धक्षेत्र जैसे दृश्य इस फिल्म की ऐसी खासियतें हैं जो ​बॉलीवुड के लिए एक नया स्टैंडर्ड सेट करते हैं। इसके लिए वीएफएक्स टीम और एडिटर्स की जितनी तारीफें की जाएं, कम है।

एक्टिंग की बात करें तो प्रभास एक असरदार एक्टर हैं। रोमांस में बहुत नहीं जमते लेकिन एक्शन और कॉमेडी के दृश्यों में वे धाक जमाते हैं। हिंदी में उन्होंने अपनी आवाज में डायलॉग्स बोले हैं और यह उनकी अच्छी कोशिश है। बॉलीवुड के हीरोज़ के लिए खतरे का संकेत भी।

श्रद्धा कपूर के लिए यह एक बहुत बड़ी फिल्म है। उन्हें एक्टिंग के अलावा एक्शन सीन के भी अच्छे मौके मिले हैं और उनकी कोशिश काबिलेतारीफ है। नील नितिन मुकेश, चंकी पांडे और मुरली शर्मा को फिल्म में बहुत अच्छे मौके मिले हैं और उन्होंने अपनी जबरदस्त छाप छोड़ी है।

नील नितिन मुकेश और चंकी पांडे दोनों ही अलग अलग ढंग से लेकिन निगेटिव रोल्स में बहुत जमने लगे हैं। फिल्म के मुख्य विलेन के रूप में चंकी पांडे ने असरदार एक्टिंग की है। फिल्म में जाने माने कलाकारों की फौज है लेकिन सबपे बात नहीं की जा सकती। जैकी श्रॉफ, महेश मांजरेकर, टीनू आनंद, मंदिरा बेदी, अरुण विजय, एल्विन शर्मा, आदित्य श्रीवास्तव और कई कलाकार आते हैं और परदे पर जमते हैं।

फिल्म में गाने आइटम की तरह हैं। बैड ब्वॉय गाने में जैकलीन फर्नांडिस का फ्लोर पर आग लगाने वाला डांस भी फिल्म की खूबी है। श्रद्धा और प्रभास के हिस्से जो रोमैंटिक गाने आए हैं उसके विजुअल्स में ही मन खो जाता है और एक एक गाने के लिए लगता है करोड़ों खर्च किए गए हैं।

कुल मिलाकर फिल्म धमाकेदार है। फुल पैसा वसूल है। और पूरे हॉल में गूंजती सीटियां और एक्साइटमेंट से भरा शोर इसके तगड़े कारोबार का इशारा करते हैं।

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