बॉलीवुड की फिल्मों से प्यार करने वालों को ‘जजमेंटल है क्या’ ने प्यार करने की एक नई वजह दी है। बॉलीवुड में साइको थ्रिलर फिल्में बहुत कम बनी हैं। ‘जजमेंटल है क्या’ साइको थ्रिलर तो है ही, इसकी सबसे खास बात है इसकी ब्लैक कॉमेडी जो अन्य फिल्मों से इसे अलग बनाती है।

फिल्म का प्लॉट ये है कि बॉबी अपने पैतृक मकान में अपने ताउजी के साथ रहती है। मकान में एक कमरे का सेट किराएदारों के लिए है। लेकिन कोई किराएदार वहां ज्यादा दिन नहीं टिकता। बॉबी की अजीबोगरीब हरकतों से घबराकर किराएदार कुछ ही दिनों में निकल लेते हैं।

उसकी अजीबोगरीब हरकतों के पीछे उसके दिमाग में बैठा बचपन का एक हादसा है। उसका पिता होली के दिन उसकी मां को पीट रहा था और बैलेंस खो देने के कारण दोनों छत से गिर गए और मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। ये सब बॉबी की आंखों के सामने हुआ था।

इसके अलावा एक और वजह है। बॉबी एक डबिंग आर्टिस्ट है। साउथ इंडियन फिल्मों के लीड फीमेल किरदारों को वह हिंदी में अपनी आवाज देती है। उसकी प्रॉब्लम ये है जैसा कि उसका दोस्त बताता है कि वह किरदारों में घुस जाती है और एक साथ उसके दिमाग में कई लोग रहते हैं।

डॉक्टर के मुताबिक बॉबी को एक्यूट साइकोसिस है। और इसे कंट्रोल में रखने के लिए बॉबी रोज दवाई खाती है।

बॉबी के घर नए किराएदार आते हैं- केशव और रीमा। उनकी नई शादीशुदा लाइफ है। दोनों खुलकर रोमांस और सेक्स करते हैं। बॉबी रीमा को कहती है, उनके कमरे से आवाजें आती हैं।
ऐसा लगता है कि अकेलेपन से जूझ रही बॉबी केशव से आब्सेस्ड है। वह रीमा की जगह अपने होने की कल्पना करती है।

एक दिन घर में आग से जलकर रीमा की मौत हो जाती है। बॉबी पुलिस को कहती है कि केशव ने अपनी वाइफ को मारा है। जबकि कुछ इशारे ऐसे मिलते हैं जिससे शक की सुई बॉबी की ओर भी घूमती है। पुलिस इसे गैस सिलेंडर फट जाने से हुआ हादसा बताकर केस बंद कर देती है।

लेकिन बॉबी की अपनी सनक है। उसेे हमेशा लगता रहता है कि केशव ने ही अपनी बीवी रीमा का मर्डर किया है। क्या उसकी यह सनक बेवजह है? पूरी फिल्म इसी बात पर घूमती है। बॉबी को सब मेंटल समझते हैं। लेकिन फिल्म में एक जगह कहा गया है— जिन्हें हम शायद नहीं समझ पाते उन्हें हम मेंटल कहते हैं।

फिल्म दर्शकों को मुंबई से लंदन की सैर कराती है। बॉबी को कुछ दिनों के लिए लंदन अपनी एक रिश्ते की बहन के पास भेज दिया जाता है। वहां भी उसकी वजह से हंगामे के हालात पैदा होते चले जाते हैं। क्या इन हंगामों की वजह उसकी अपनी दिमागी बीमारी है या कुछ और? क्या रीमा का मर्डर हुआ था? क्या केशव बेकसूर है? इन सवालों के जवाब आपको फिल्म देखकर ही मिलेंगे।

डायरेक्शन की बात करें तो वह एकदम सधा हुआ है। फिल्म के हर पहलू पर इसके डायरेक्टर प्रकाश कोवलामुडी की पकड़ महसूस की जा सकती है। फिल्म दिलचस्प, कसी हुई, अलग हटके और दमदार है। अपनी तेलगू फिल्मों के लिए तारीफ बटोर चुके प्रकाश की बॉलीवुड में यह जोरदार दस्तक है। फिल्म की स्क्रिप्ट कनिका ढिल्लन ने बहुत डूबकर लिखी है। हम आपको बता दें कि इससे पहले रा-वन, मनमर्जियां और केदारनाथ की स्क्रिप्ट लिख चुकी कनिका और डायरेक्टर प्रकाश कोवलामुडी पति-पत्नी हैं।

‘जजमेंटल है क्या’ के हर फ्रेम में पंकज कुमार की कैमरे के पीछे की मेहनत दिखाई देती है। फिल्म के कलर की तारीफ बॉलीवुड के कई दिग्गजों ने की है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक बहुत पावरफुल है। एक मर्डर मिस्ट्री और ब्लैक कॉमेडी दोनों को पेश करने में उसे कामयाबी मिली है। फिल्म में गानों की ज्यादा गुंजाइश नहीं थी। फिल्म में सिर्फ एक गाना किस रस्ते है जाना’ रखा गया है। और वह फिल्म के थीम को असरदार ढंग से प्रस्तुत करता है।

वखरा स्वैग एक एक्स्ट्रा गाना है जो फिल्म के प्रमोशन के लिए रखा गया है। यह फिल्म का हिस्सा नहीं है और फिल्म खत्म होने के बाद चलता है।

अब बात करते हैं कंगना रनौत और राजकुमार राव की एक्टिंग की क्योंकि फिल्म मुख्यत: इन्हीं दोनों की एक्टिंग पर टिकी हुई है। दोनों ही शानदार एक्टर हैं और ‘जजमेंटल है क्या’ इन दोनों की एक्टिंग के लिए याद रखी जाएगी। यह दोनों की अब तक की बेस्ट फिल्मों में एक कही जा सकती है। खासकर कंगना रनौत ने जिस तरह के किरदार को निभाया है, उसे इस खूबी से निभाने की ताकत बॉलीवुड की शायद किसी दूसरी एक्ट्रेस में न हो।

कंगना ने पहले कहा था, बॉबी का किरदार उनकी निजी जिंदगी से मिलता है। निजी जिंदगी में उन्हें कई बार सुनने को मिला है कि कंगना तो मेंटल है। उनके नजरिए को कभी सीरियसली नहीं लिया गया। कंगना ने बॉबी के किरदार को परदे पर जस्टिफाई करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। राजकुमार राव ने रोमैंटिक और शातिर दोनों तरह की भूमिका को जीवंत कर दिया है। लेकिन केशव का साइकोलॉजिकल पहलू बॉबी की तुलना में थोड़ा कमजोर रह गया है। हालांकि राजकुमार राव ने अपनी शानदार ​एक्टिंग से इस कमजोरी को ढंक दिया है।

फिल्म के अन्य किरदारों को जिम्मी शेरगिल, अमायरा दस्तूर, नुसरत भरुचा, ब्रजेंद्र काला, हुसैन दलाल आदि कलाकारों ने बखूबी पेश किया है।

फिल्म में दर्शकों को रामायण की एक अलग व्याख्या देखने को मिलेगी। साथ ही रामायण के किरदारों का इस तरह की मर्डर मिस्ट्री को आगे बढ़ाने के लिए ऐसा अनोखा इस्तेमाल पहली बार देखने को मिलेगा।

अगर आप रोमांस, एक्शन और फैमिली ड्रामा से हटकर कुछ देखना चाहते हैं तो यह फिल्म बिलकुल भी मिस न करें।

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